गुरुवार, 28 अगस्त 2008

आईना देखकर मुस्कराना सिख गए हो,
गैरों से दिल का लगाना सिख गए हो...
दुनियांदारी की ज़मी पर हथेली रखकर,
हर शख्स को आजमाना सिख गए हो....

1 टिप्पणी:

satishsingh.journalist.com ने कहा…

आईना देखकर मुस्कराना सिख गए हो,
गैरों से दिल का लगाना सिख गए हो...
दुनियांदारी की ज़मी पर हथेली रखकर,
हर शख्स को आजमाना सिख गए हो....